फ़्रांस के इस बिल से खौफ में क्यों मुस्लिम?

इस पूरे बिल में कहीं भी मुस्लिम या इस्लाम जैसे शब्द का कहीं कोई जिक्र नहीं है लेकिन फिर भी इस बिल के विरोध में कई मुस्लिम बुद्धिजीवी आ गये हैं. इस बिल में सैमुएल पैटी के नाम से भी एक प्रावधान जोड़ा गया है जिनकी पिछले साल अक्टूबर में हत्या कर दी गई थी.

फ़्रांस के इस बिल से खौफ में क्यों मुस्लिम?

हाल ही में फ्रांस ने मजहबी कट्टरता से लड़ने के लिए Anti Radicalism Bill पास किया है। इस बिल के चलते एक बार फिर फ़्रांस और दुनियाभर में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोग गुस्से में हैं। कई स्थानों पर इस बिल को लेकर प्रदर्शन भी हुए और इसे इस्लाम के खिलाफ बताया गया। हालांकि इस कानून से जुड़ी सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस बिल में कहीं भी एक भी बार Islam शब्द का उपयोग नही किया गया है फिर भी French और दुनिया भर के मुस्लिम और कथित मानवाधिकार संगठन इसे Islam से जोड़कर देख रहे हैं।

France के Anti Radicalism Bill के 10 महत्त्वपूर्ण बिंदु

1) यदि कोई व्यक्ति ये कहता है कि उसकी पत्नी या बच्ची की मेडिकल जांच कोई पुरुष डॉक्टर नहीं करेगा या शादी के लिए अगर कोई व्यक्ति किसी लड़की को मज़बूर करता है या एक से अधिक शादी करता है तो उस पर लगभग 13 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान इस क़ानून में है। शरिया क़ानून के मुताबिक़ कोई भी मुसलमान चार शादी कर सकता है। लेकिन अब फ्रांस ने इस पर रोक लगा दी है।

2) इस क़ानून में सैमुएल पैटी के नाम से एक प्रावधान जोड़ा गया है, जिसकी वजह से इसे Samuel Paty Law भी कहा जा रहा है। इसके तहत अगर कोई व्यक्ति किसी सरकारी कर्मचारी और अधिकारी के ख़िलाफ़ उससे जुड़ी निजी जानकारियों को सोशल मीडिया पर शेयर करता है तो उस पर लगभग 40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और इसमें तीन साल की जेल का भी प्रावधान है।

सैमुएल पैटी फ्रांस के एक शिक्षक थे, जिनकी पिछले साल चेचेन के एक आतंकी द्वारा अक्टूबर में हत्या कर दी गई थी। उन्होंने अभिव्यक्ति के अधिकार पर चर्चा करते हुए अपने स्कूल के कुछ छात्रों को पैगम्बर मोहम्मद का एक विवादास्पद कॉर्टून दिखाया था, जिसके बाद स्कूल के एक छात्र ने ये जानकारी अपने परिवार को दे दी थी और बाद में उनकी हत्या कर दी गयी थी। ये हत्यारा 6 वर्ष की उम्र में रूस के एक प्रांत Chechnya से एक शरणार्थी के रूप में फ्रांस आया था। इसका नाम Abdullah Anzorov था।

3) इस बिल के अनुसार सभी नागरिकों को फ्रांस की धर्मनिरपेक्षता और संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करना होगा चाहे वे जिस मजहब से संबंध रखते हों।

4) यदि कोई व्यक्ति फ्रांस के किसी भी सरकारी अधिकारी या जनप्रतिनिधि को डराता है और उसे फ्रांस के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के ख़िलाफ़ जाने के लिए मजबूर करता है तो उसे 5 साल तक की जेल होगी और उस पर क़रीब 65 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

5) अगर कोई व्यक्ति अपने बच्चों को घर पर ही पढ़ाना (Home Schooling) चाहता है तो उसे फ्रांस की सरकार से इसकी अनुमति लेनी होगी और इसकी ठोस वजह भी बतानी होगी।

6) फ़्रांस में सरकार के प्रतिनिधि अब से ये सुनिश्चित करेंगे कि खेल कूद में किसी तरह का कोई लिंग भेदभाव न हो।

7) जैसे लड़कियों के लिए अलग स्विमिंग पूल हो और लड़कों के लिए अलग फ्रांस की सरकार अब इसकी इजाजत नहीं देगी।

8) इस नए क़ानून के तहत फ्रांस के सभी धार्मिक संस्थानों को विदेशों से मिलने वाले चंदे की जानकारी सरकार को देनी होगी। अगर फंडिंग 8 लाख रुपये से ज़्यादा है तो उन्हें ये सरकार को बताना होगा और ऐसा नहीं करने पर फ्रांस की सरकार ऐसे धार्मिक संस्थानों को देश से मिलने वाली आर्थिक सहायता बंद कर देगी।

9) जिन अलग अलग समूहों और संस्थाओं को सरकार से विशेष सहायता मिलती है, उन्हें एक समझौते पर हस्ताक्षर करने होंगे। इस समझौते के तहत उन्हें फ्रांस के संवैधानिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का सम्मान करना होगा।

10) फ्रांस में अब से धार्मिक संस्थानों में ऐसे भाषण नहीं दिया जा सकेंगे, जिनसे दो समुदायों के बीच टकराव और वैमनस्य पैदा हो।

इन महत्वपूर्ण बिन्दुओं के साथ ही कई ऐसे कड़े प्रावधान किये गए हैं जिसके चलते फ़्रांस और दुनियाभर का मुस्लिम समुदाय इस बिल के खिलाफ हो गया है। इस बिल में यह भी प्रावधान है कि जिन लोगों पर फ्रांस में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप होगा, ऐसे लोगों पर धार्मिक संस्थानों में हिस्सा लेने पर 10 साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।

फ़्रांस के इस बिल से नाराज क्यों है मुस्लिम समुदाय

फ़्रांस के इस कानून से जुड़ी एक और खास बात यह है कि अब से सार्वजनिक जगहों पर फ़्रांस में धार्मिक चिन्हों के प्रदर्शन पर प्रतिबंध होगा। अब तक फ्रांस के निजी दफ्तरों में मुस्लिम महिलाएं बुर्का और हिजाब पहन कर नहीं जा सकती थीं। लेकिन इस कानून के तहत अब ऐसी निजी कंपनियों को भी इसके दायरे में लाया गया है, जो जन सुविधाओं से जुड़ी हैं। जैसे ट्रेन, बस, रेस्‍टोरेंट और दूसरी सेवाएं।

इस पूरे बिल में कहीं भी मुस्लिम या इस्लाम जैसे शब्द का कहीं कोई जिक्र नहीं है लेकिन फिर भी इस बिल के विरोध में कई मुस्लिम बुद्धिजीवी आ गये हैं। मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने इस बिल के लिए फ्रेंच राष्ट्रपति एमनुएअल मैक्रॉन की निंदा की है जिसमें भारत से भी कई नाम हैं। हालांकि फ़्रांस में लेफ्ट और राईट दोनों ही धड़े ने इस बिल का स्वागत किया है। माना जा रहा है फ्रांस के इस कदम के बाद यूरोप के अन्य देश भी फ्रांस का अनुसरण कर सकते हैं।

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