कपिल मिश्रा के Hindu Ecosystem से डर गया है Left-Liberal Ecosystem?

कपिल मिश्रा ने जो मुहिम शुरू की थी उसके परिणाम दिखने लगे हैं. कुछ महीने पहले शुरू हुए Hindu Ecosystem ने 200 वर्ष पुराने Left-Liberal Ecosystem को डरा दिया है.

कपिल मिश्रा के Hindu Ecosystem से डर गया Left-Liberal Ecosystem?
Photo from Kapil Mishra Facebook Page

Left-Liberal Ecosystem और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर भारत में आज भी खास जागरूकता देखने को नहीं मिलती. विकसित देशों में समय रहते इस Ecosystem को पहचान लिया गया था जिस कारण इन्हें वहां कभी हावी नहीं होने दिया गया लेकिन जिन देशों पर ये हावी हुए वो आजतक इनके दुष्प्रभाव से नहीं उबर पाए. ये अवश्य हुआ कि, कुछ विकसित देशों ने विकासशील देशों को टारगेट करने के लिए उनके Left-Liberal Ecosystem का भरपूर पालन-पोषण किया.

दुर्भाग्य से भारत भी उसी श्रेणी के देशों में आता है जहाँ इनका व्यापक प्रभाव है. चाहे वह Academia में हो, Media में, फिल्म जगत में या फिर सरकारी संस्थानों में. भारत में नरेंद्र मोदी सरकार के उदय के बाद इनका प्रभाव जरुर कम हुआ है लेकिन आज भी इस Ecosystem का प्रभाव हम कई क्षेत्रों में देख सकते हैं. इनकी कमर तोड़ना आसान काम तो नहीं है लेकिन मुश्किल भी नहीं बस इच्छाशक्ति की जरूरत है.

Hindu Ecosystem का उदय

Left-Liberal Ecosystem को पालने-पोसने वाली सरकारें फ़िलहाल सत्ता से बाहर हैं लेकिन अब तक इस Anti-Indian और Anti-Hindu गिरोह का कब्जा कई महत्त्वपूर्ण स्थानों पर बना हुआ है. ऐसा इसलिए भी है कि, इस Ecosystem को तोड़ने के लिए कोई भी जिम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं है. ऐसे में भाजपा नेता और प्रख्यात समाजसेवी कपिल मिश्रा ने पिछले दिनों Hindu Ecosystem बनाने की घोषणा की थी.

कपिल मिश्रा के Hindu Ecosystem ने पिछले कुछ महीने में काफी कार्य हैं. चाहे वह गरीब परिवारों की मदद करना हो या फिर विष्णु तिवारी जैसे बेसहारा लोगों के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाना. कपिल मिश्रा ने कई ऐसे काम किये जिसकी समाज को सख्त जरूरत थी.

जिन्हें कोई नहीं पूछता उनकी आवाज बने कपिल मिश्रा

कपिल मिश्रा ने उन लोगों की तरफ मदद के लिए हाथ बढ़ाया जिन्हें ना सरकार पूछती है, ना ही देश के नेता और ना ही खुद को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताने वाला मीडिया.

कपिल मिश्रा ने जो काम शुरू किया उसके लिए उन्हें अंजाम भुगतना ही था जिसका परिणाम ये हुआ कि, उनके खिलाफ Left-Liberal Ecosystem ने बेहद संगठित ढंग से Crusade की शुरुआत कर दी है.

पिछले कुछ दिनों से ना ही मात्र कपिल मिश्रा बल्कि उनका Hindu Ecosystem भी निशाने पर है. ये देखना बेहद हास्यास्पद है कि, एक कुछ महीने पुराने Ecosystem ने उस Left-Liberal Ecosystem की चूलें हिला दी हैं जिसकी स्थापना लगभग 200 वर्ष पहले ब्रिटेन ने की थी.

मैकाले और मैक्समूलर का एजेंडा आगे बढ़ाने वालों में डर का माहौल

आज हम भारत में जो Left-Liberal Ecosystem देखते हैं वो 1947 में सत्ता हस्तांतरण के बाद अचानक से नहीं पैदा हुआ बल्कि इसकी शुरुआत 15 January 1784 को ब्रिटिश Propogandist विलियम जोंस ने Asiatic Society बनाकर कर दी थी.

विलियम जोंस, मैकाले और मैक्समूलर जैसे ब्रिटेन के पाले हुए Propagandist ने भारत की Academia में जो जहर घोलना शुरू किया था आज का Left-Liberal Ecosystem उसी काम को आगे बढ़ा रहा है. भारत को नीचा दिखाना हो, पिछड़ा साबित करना हो या फिर हिन्दुओं को विलेन बनाना हो इस Ecosystem ने ये काम बखूबी किया.

अब जब इन्हें बराबर जवाब मिलने लगा है तो ये आये दिन एक नए ड्रामे के साथ सामने आ जाते हैं जिसमें से सबसे ज्यादा कुख्यात है “डर का माहौल.” मजे की बात यह है कि, ये डर का माहौल एक ख़ास समय पर ही आता है.

Colonialism Past अभी भी Left-Liberal Ecosystem पर हावी

भारत का Left-Liberal Ecosystem कई मायनों में अनूठा है. जहाँ कई देशों में Left-Liberal Ecosystem को चीन और रूस से जोड़ा जाता है वहीं भारत में यह एकदम अलग है. भारत में इसकी नींव ब्रिटेन ने डाली थी. ब्रिटिश साम्राज्य ने खाद-पानी देकर इनका पालन-पोषण किया था. आज इसका पोषण अमेरिका और यूरोप के कई NGO करते हैं.

यही कारण है कि, भारत की इतिहास की किताबों में आपको ईसाई सभ्यताओं द्वारा किये गए पाप ढूंढकर भी नहीं मिलेंगे. आपको आर्यों का भारत पर काल्पनिक आक्रमण तो देखने को मिलेगा लेकिन ईसाईयों द्वारा दुनियाभर में किये गए नरसंहार मुश्किल से ही देखने को मिलेंगे.

1947 के बाद कांग्रेस सरकारों ने भी ब्रिटेन की तरह ही खाद-पानी देकर इस Ecosystem को मजबूत करने का काम किया. सरकारी संरक्षण में पलने का ही परिणाम है कि, Left-Liberal Ecosystem को पहले कभी चुनौती नहीं मिली थी और जब आज मिली है तो उन्हें दर्द शुरू हो गया है.

भारतीय शिक्षा व्यवस्था का कबाड़ा करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका

भारत के Left-Liberal Ecosystem ने ब्रिटेन के बनाये ढांचे पर चलते हुए Anti Indian Propaganda फैलाने में जो कार्य किये आज वो भारतीय पाठ्यक्रम का हिस्सा बन चुके हैं. यही कारण है कि, सबसे ज्यादा उच्च शिक्षित लोगों का देश होते हुए भी भारत आजतक पिछड़ा है.

शिक्षा के जिन क्षेत्रों में भारत पिछड़ा है वहां तो दयनीय स्थिति है ही साथ ही भारत जिस क्षेत्रों में मजबूत है वहां उससे भी ज्यादा दयनीय स्थिति है क्योंकि उच्च शिक्षा मिलते ही ज्यादातर भारतीय छात्र देश छोड़कर अमेरिकन और यूरोपीय कंपनियों में काम करना शुरू कर देते हैं बजाय के कि भारत में ही अमेरिका-यूरोप जैसे कारपोरेशन बनाने के.

भारत के पारंपरिक व्यापारियों के पेट पर लात मारने के पीछे Left-Liberal Ecosystem की भूमिका

भारत का Academic पिछड़ापन हो या फिर Economic इसमें Left-Liberal Ecosystem की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है. जिसने ना ही मात्र नौकरी वाली मानसिकता भारतीयों में पैदा की बल्कि भारतीयों के काम धंधे छुडवाने में भी बखूबी योगदान दिया.

जुलाहों का कारोबार हो या फिर चर्मकारों का, उन्हें धंधाविहीन करने का काम इसी Ecosystem के एजेंडे का परिणाम था. अगर इस विचारधारा के लोगों को मानसिक विकलांग की संज्ञा दी जाय तो गलत नहीं होगा. जिन लोगों के कामों को इन्होने छोटा बताकर छुडवा दिया वही काम अब बड़ी-बड़ी कंपनियां करके करोड़ों-अरबों कमा रही हैं.

नरेंद्र मोदी सरकार से क्यों चिढ़ता है Left-Liberal Ecosystem?

नरेंद्र मोदी की भाजपा सरकार से Left-Liberal Ecosystem के नफरत करने का सबसे बड़ा कारण है कि, मोदी सरकार ने पिछली सरकारों की तरह इस गिरोह का पालन पोषण बंद कर दिया और उनके विदेशी चंदे पर रोक लगा दी.

Left-Liberal Ecosystem की आय का मुख्य स्रोत हमेशा से ही पश्चिमी देशों से मिलने वाली Funding रही है जो अब आसान नहीं रह गयी. अगर मोदी सरकार इनका Royal Status पहले की तरह Maintain रखती तो ये निश्चित ही मोदी सरकार को लेकर इतनी नफरत भरी सोच नहीं रखते.

कपिल मिश्रा पर उल्टा पड़ गया Left-Liberal Ecosystem का दांव

कपिल मिश्रा और उनके Hindu Ecosystem को बदनाम करने के लिए Left-Liberal Ecosystem से जुड़े कुछ मीडिया संस्थानों ने असफल Propaganda चलाने की कोशिश की लेकिन उनका दांव उल्टा पड़ गया. इसके चक्कर में वो Expose तो हुए ही साथ ही ये भी बता गये कि कपिल मिश्रा का Hindu Ecosystem उनके लिए सिरदर्द है.

Hindu Ecosystem को निशाना बनाने वाले लोगों की अगर सूची देखी जाय तो उसमें ऐसे-ऐसे नाम हैं जिन पर देश में सामाजिक वैमनस्य फैलाने से लेकर हिन्दुओं को विश्व भर में खलनायक बनाने तक के आरोप हैं. कुछ तो ऐसे हैं जिन्हें अगर पश्चिमी शक्तियों का पालतू कहा जाय तो गलत नहीं होगा.

क्या मुसलमानों के खिलाफ है Hindu Ecosystem?

कपिल मिश्रा के Hindu Ecosystem पर जो सबसे बड़ा आरोप लगा वो है मुस्लिम विरोधी होने का. वामपंथी मीडिया संस्थानों को Hindu Ecosystem को बदनाम करने के लिए जो सबसे टेस्टी चूरन मिला वो था उसे मुस्लिम विरोधी साबित करना. लेकिन ये Left-Liberal Ecosystem ये बात भूल गया कि, ये Strategy अब Outdated हो चुकी है.

हिन्दू संगठनों को बदनाम करने के लिए अमेरिका से लेकर यूरोप तक जो आरोप हमेशा से लगता आया है वो होता है उन्हें मुस्लिम और ईसाई विरोधी साबित करना. दुनिया का कोई भी हिन्दू संगठन हो उसे कभी तारीफ मिलना तो दूर उसके सकारात्मक कार्यों की भी दुनिया में कोई चर्चा शायद ही होती हो. यही कारण है कि, जागरूक जनमानस अब ऐसे Propaganda को गंभीरता से नहीं लेता.

इस्लामिक-ईसाई संगठन Holy Organization लेकिन हिन्दू संगठन Nazi-Fascist

दुनिया भर में फैली भारत विरोधी ताकतें हों या फिर भारत का Left-Liberal Ecosystem जो व्यवहार ये हिन्दू संगठनों के साथ करते हैं ऐसा वो इस्लामिक या ईसाई संगठनों के साथ बिलकुल भी नहीं करते. बल्कि वो उनके लिए Holy Organization की तरह हैं.

हिन्दू संगठनों को कभी नाजी बताना हो तो कभी फासिस्ट इसमें ये मानसिक विकलांग ज़रा भी देर नहीं लगाते, लेकिन इस्लामिक एवं ईसाई संगठन किसके समर्थक या विरोधी हैं इस भारत विरोधी Ecosystem को उससे कोई फर्क नहीं पड़ता. बल्कि वो उनके समर्थन में उन्हें मासूम बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते.

भारत में घटी कोई भी नकारात्मक घटना हो Left-Liberal Ecosystem से जुड़े पत्रकार उसे लेकर अमेरिकन और यूरोपीय मीडिया संस्थानों के लिए आर्टिकल लिखना नहीं भूलते लेकिन भारत के सकारात्मक पक्ष को दिखाना ये अपनी शान के खिलाफ समझते हैं.

Hindu Ecosystem को ऐसे लोगों द्वारा निशाना बनाया जाना कहीं ना कहीं इस ओर इशारा करता है कि, उन्हें पहली बार कहीं से चुनौती मिली है.

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