भारत के मूलनिवासी हैं आर्य, जानें ब्रिटेन के पालतू इतिहासकारों ने क्यों बनाया विदेशी

इस देश में ईरान से पारसी आये और इजराइल से यहूदी भी, उन्हें हम भारतीयों ने विदेशी बोलकर कभी उनका अपमान नहीं किया लेकिन भारत की ब्रिटिश शिक्षा प्रणाली से निकले कुछ दूषित दिमागों ने भारत के मूलनिवासी आर्यों को ही विदेशी बताना शुरू कर दिया

भारत के मूलनिवासी हैं आर्य, जानें ब्रिटिशों ने क्यों बनाया विदेशी?
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“जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” अर्थात् जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी श्रेष्ठ हैं. भारत के मूलनिवासी आर्य, जिन्होंने भारत भूमि को स्वर्ग से भी ऊँचा दर्जा दिया उन्हें इतिहास की किताबों में कभी यूरेशिया तो कभी ईरान से आया हुआ बताया गया है.

ब्रिटेन ने भारत को तोड़ने के लिए हरसंभव वो कार्य किये जो वह कर सकते थे. उन्होंने ना ही मात्र भारतीय समाज में बंटवारा किया बल्कि बल्कि ऐसे-ऐसे झूठे Narratives गढ़े जिसका कोई आधार नहीं था.

ब्रिटिशों द्वारा गढ़े ऐसे झूठे Narratives आज भी प्रचलन में है क्योंकि भारतीय शिक्षा प्रणाली जिसे ब्रिटेन ने भारतीय समाज को पंगु बनाने के लिए डिजाईन किया था वह आज भी जस की तस चल रही है.

ब्रिटेन ने भारत के मूलनिवासी आर्यों को बाहर से आया हुआ क्यों बताया?

भारत में बांटो और राज करो नीति के तहत जो भ्रम भारतीय समाज में शिक्षा के माध्यम से फैलाये गये उनमें से सबसे प्रमुख था भारतीयों को ही किसी अन्य स्थान से आया हुआ बताना.

ब्रिटेन पोषित समूहों एवं उनकी शिक्षा व्यवस्था से पढ़ कर निकले भारतीयों ने इस भ्रम को और मजबूत किया. आपने अगर भारत में शिक्षा हासिल की है तो आपने Aryan Invasion Theory के बारे में अवश्य पढ़ा होगा.

अगर नहीं भी पढ़ा होगा तो आजकल अपने सोशल मीडिया में भारत के मूलनिवासी लोगों को लेकर जारी बहस जरुर देखी होगी.

इस Narrative के समर्थन में जितने भी विद्वानों ने अबतक शोध किया या किताबें लिखीं गयीं उन्होंने सिर्फ ब्रिटिश कचरा ही फैलाया, खुद का कोई विचार नहीं प्रस्तुत किया.

भारत के मूलनिवासी आर्यों को बाहर से आया हुआ बताने के चार प्रमुख कारण थे:

1. विदेशी शासन को भारत में उचित ठहराना

भारतीय जनमानस द्वारा जब भारत में ब्रिटिशों के शासन को विदेशी हमला बताकर विरोध किया जाने लगा तो उसको लेकर ब्रिटेन की Propaganda Machinery ने एक नयी तरकीब निकाली.

ब्रिटिशों ने भारत में अपने विदेशी शासन को उचित ठहराने के लिए शिक्षा के माध्यम से ये झूठ फैलाना शुरू किया कि, तुम भारतीय खुद बाहर से आये थे इसलिए हमारे आने में भारतीयों को कोई समस्या नहीं होनी चाहिए.


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गुरुकुलों को ख़त्म करके ब्रिटेन ने जो स्कूल प्रणाली भारत में शुरू की उसके माध्यम से ब्रिटिशों ने अपना वह हर Propaganda भारत में स्थापित करना शुरू किया जिससे ब्रिटिश शासन को लाभ हो सकता था.

कई वर्षों के प्रयासों के पश्चात् ब्रिटिशों के प्रयास रंग लाये और उनकी शिक्षा व्यवस्था से निकले कुछ भ्रमित बुद्धिजीवियों ने इस Propaganda को सच मान लिया कि, वो लोग जो खुद को भारतीय समझते हैं वो बाहर से आये आक्रमणकारी थे.

इस झूठे तथ्य को गढ़ने में बेहद ही मूर्खतापूर्ण तर्क रखे गये, मसलन कुछ भारतीयों की चमड़ी एवं बालों का रंग, उनकी कद-काठी और बुद्धिमत्ता.

2. बांटो और राज करो नीति

आर्य बाहर से आये आक्रमणकारी थे ये कहानी भारत में स्थापित करने के पीछे जो दूसरा सबसे बड़ा कारण था वो था ब्रिटेन की कुख्यात, ‘बांटो और राज करो की नीति.’

अपनी इस नीति के तहत ही ब्रिटिश साम्राज्य का लक्ष्य था कि, भारत के लोगों में आपस में ही इतनी फूट पैदा कर दो कि वो खुद का अस्तित्व ही भूलकर आपस में लड़ना शुरू कर दें.

इसी बांटो और राज करो की नीति के बल पर ब्रिटिश लंबे समय तक भारत में टिके रहे. ब्रिटिशों की उसी साजिश का परिणाम है आज खुद को मूलनिवासी और ब्राह्मणों को विदेशी बताने वाले समूह भारत में जन्म ले चुके हैं और दिन रात ब्रिटेन का एजेंडा आगे बढ़ा रहे हैं.

3. भारत में ईसाईयत को बढ़ावा देना

ईसाईयत कई देशों में सफल में रही और यूरोपीय देशों के हमले के बाद अफ्रीका से लेकर दक्षिण अमेरिका तक कई देश ईसाई देश बना दिए गये. कुछ ऐसा ही लक्ष्य ब्रिटिश शासन का भारत में था.

हालाँकि भारत कई मायनों में अलग था जहाँ ना ही ब्रिटेन सीधे युद्ध से कोई मत स्थापित कर सकता था और ना ही किसी झांसे में लेकर इसलिए उसने शातिर तरीके से शिक्षा को माध्यम बनाया.


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भारत में ईसाई स्कूलों की जो बड़ी मात्रा हमें देखने को मिलती है उसका लक्ष्य सिर्फ भारतीयों को ईसाई तरीके से शिक्षा देना ही नहीं था बल्कि उन्हें ईसाई धर्म को स्वीकार करने लायक भी बनाना था.

भारत को लूटने के साथ ही इस देश में ईसाई मत स्थापित करना ब्रिटिश शासन और यूरोपीय मिशनरियों का प्रमुख मिशन था. ईसाईयत भारत में तभी सफल हो सकती थी जब भारत के प्रमुख धर्म और संस्कृति को ही विदेशी बता दिया जाय और उस विदेशी धर्म को एक अन्य विदेशी मजहब से Replace कर दिया जाय.

ब्रिटेन द्वारा बनाई गयी शिक्षा प्रणाली पर चल रहे भारत के स्कूल और किताबें अभी भी वही एजेंडा आगे बढ़ा रहे जो ब्रिटेन ने किसी समय अपने निहित स्वार्थों के लिए भारत में लागू किये थे.

4. भारतीयों को मूर्ख एवं जाहिल साबित करना

ब्रिटिशों ने वह हरसंभव कोशिश की जिससे वह भारतीयों को जाहिल एवं मूर्ख साबित कर सकें. चाहे वह उनके गुरुकुल नष्ट कर उनकी शिक्षा व्यवस्था तबाह करना हो या फिर उनके काम धंधे छीनना हो.

भारत की वह आबादी जो ज्ञानी थी और गुरुकुलों का संचालन करके भारतीयों को शिक्षित बनाती थी उसे ही ब्रिटेन ने विदेशी बताना शुरू कर दिया जिससे भारतीय जनमानस में यह संदेश दिया जा सके कि, तुम लोग जाहिल थे और यह जो पढ़े-लिखे लोग हैं ये सब विदेशी हैं.


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गुरुकुलों से दूर होने के कारण भारत की एक बड़ी आबादी अशिक्षित हो गयी और जिनका पढाई-लिखाई करना ही पारंपरिक पेशा था उन्होंने थोड़ा-बहुत शिक्षा का स्तर बनाये रखा लेकिन सामाजिक एवं आर्थिक पतन से वो भी ना बच सके.

अगर आज कोई खुद को मूलनिवासी बताता है और आर्यों को विदेशी तो एकतरह से वह खुद के पूर्वजों को ही गाली दे रहा होता है जिन्होंने ब्रिटिश सत्ता के सबसे ज्यादा अत्याचार सहे.

भारत के मूलनिवासी कौन?

ब्रिटिशों द्वारा गढ़ा ये Narrative आज भारत में नासूर बन चुका है. इसकी झलक हम भारत के विश्वविद्यालयों से लेकर सोशल मीडिया तक देख सकते हैं.

वास्तविकता यह है कि, अभी हम जो भारतीय, पाकिस्तानी या फिर नेपाली जैसा राजनीतिक ठप्पा अपने ऊपर लगाये घूम रहे हैं ये बेहद ही नयी प्रवृत्ति है. अभी हम जो देश देखते हैं इनके बॉर्डर भी ब्रिटेन और यूरोपीय उपनिवेशवाद की देन हैं.


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आज हम जिसे भारत कहते हैं यहाँ कभी देशी या विदेशी जैसी कोई चीज नहीं रही. यही कारण है कि, इस भूमि पर ईरान से आये पारसियों को भी प्रेम मिला, इजराइल से आये यहूदियों को भी जिन्हें कभी भारतीयों ने विदेशी बोलकर उनका अपमान नहीं किया.

लेकिन अब भारत में ऐसे वर्ग का उदय हो चुका है जो खुद को भारत के मूलनिवासी बताना पसंद करते हैं और अन्य लोगों को विदेशी बताते हैं. असल में ऐसे लोगों को ना इतिहास का ज्ञान है ना भूगोल का उन्हें बस ये पता है जो उन्हें एक दूषित शिक्षा प्रणाली ने पढ़ाया है.

ब्रिटेन भारत में राज करने के वक्त अपने जिन एजेंडों को परवान नहीं चढ़ा पाया उसकी शिक्षा प्रणाली से निकले कुछ दूषित दिमाग उसको पूरा करने में दिन रात लगे हैं.

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