म्यांमार में हिंसक प्रदर्शनों के पीछे जार्ज सोरोस का हाथ?

पिछले दिनों जार्ज सोरोस की ओपन फाउंडेशन पर अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप विरोधी हिंसक प्रदर्शनों की फंडिंग करने के भी आरोप लगे थे. चर्चा में रहे Black Lives Matter Protest के तार भी जार्ज सोरोस की ओपन फाउंडेशन से जुड़े बताये जाते हैं.

म्यांमार में हिंसक प्रदर्शनों के पीछे जार्ज सोरोस का हाथ?
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जार्ज सोरोस एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार मुद्दा बना है म्यांमार में सेना द्वारा हुआ तख्तापलट. म्यांमार में तख्तापलट के बाद हिंसक प्रदर्शनों का जो दौर शुरू हुआ है उसने दुनिया भर का ध्यान खींचा है.

म्यांमार सैन्य शासन द्वारा देश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को वित्तपोषित करने एवं म्यांमार में अशांति फैलाने के आरोप में अमेरिकन अरबपति जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन (OSF) के बैंक खातों को जब्त कर लिया गया है.

हिंसक प्रदर्शनों को लेकर बदनाम है जार्ज सोरोस की संस्था

पिछले दिनों जार्ज सोरोस की ओपन फाउंडेशन पर अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप विरोधी हिंसक प्रदर्शनों की फंडिंग करने के भी आरोप लगे थे. चर्चा में रहे Black Lives Matter Protest के तार भी जार्ज सोरोस की ओपन फाउंडेशन से जुड़े बताये जाते हैं.

ओपन फाउंडेशन के काम को देखते हुए अब ऐसे प्रश्न खड़े होने लग गये हैं कि, ये अमेरिकन संस्थाएं आखिरकार क्यों हिंसक प्रदर्शनों का वित्तपोषण करती हैं एवं उन सरकारों के काम में दखल देती हैं जिनसे उनका वैचारिक मतभेद है.

सोरोस और ओपन फाउंडेशन पर विदेशों में दखल देने का ये आरोप पहली बार नहीं लगा है बल्कि उनपर पिछले कई वर्षों से ऐसे आरोप लगते आये हैं कि, वह एक ख़ास विचारधारा के लोगों वित्तपोषित करके दुनिया भर में उपद्रव को बढ़ावा देते हैं.


पढ़ें: म्यांमार में तख्तापलट के पीछे किसका हाथ?


म्यांमार में ना ही मात्र जार्ज सोरोस के ओपन फाउंडेशन पर कड़ी कार्यवाही की जा रही है बल्कि सोरोस के संगठन से जुड़े लोगों को भी हिरासत में लिया जा रहा है.

म्यांमार सेना द्वारा किये गए तख्तापलट की दुनिया भर में निंदा हुई लेकिन जो हिंसक प्रदर्शनों का दौर चला है वो कई देशों के लिए चिंता का सबब है. खासकर भारत जैसे पड़ोसियों के लिए जिन पर आगे चलकर अनावश्यक दबाव बन सकता है.

म्यांमार में हिंसक प्रदर्शनों का भारत पर प्रभाव

म्यांमार से शरणार्थी बड़े पैमाने पर भारत का रुख कर सकते हैं. फ़िलहाल छोटे समूहों में कई लोगों ने भारत में शरण ली है जिनकी संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

भारत एक बार फिर उसी स्थिति में पहुंच सकता है जैसा 70 के दशक में बांग्लादेश में हिंसक प्रदर्शनों के दौरान हुआ था. बड़ी संख्या में शरणार्थियों के भारत में शरण लेने के चलते भारत को बांग्लादेश में कार्यवाही भी करनी पड़ी थी.

जार्ज सोरोस की संस्था क्यों दे रही म्यांमार में दखल?

म्यांमार में तख्तापलट को लेकर चल रहे हिंसक प्रदर्शनों को पहले भी कई लोगों पश्चिमी देशों द्वारा वित्तपोषित बताया था लेकिन जार्ज सोरोस की ओपन फाउंडेशन का नाम आने का बाद लोगों की इन शंकाओं को बल मिला है कि, पश्चिमी देश एक बार फिर से म्यांमार में सक्रिय हो गये हैं.

जार्ज सोरोस की संस्था द्वारा म्यांमार की सेना के खिलाफ किये जा रहे हिंसक प्रदर्शनों के पीछे सोरोस की म्यांमार की चुनी हुयीं नेता आंग सू की सरकार से करीबी बताई जा रही है. जिनसे कई मौकों पर खुद जार्ज सोरोस ने मुलाक़ात की थी.

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