Project Thessalonica: हिन्दू त्यौहारों को खत्म करने का षड्यंत्र

Project Thessalonica के अंतर्गत जो सबसे महत्त्वपूर्ण लक्ष्य है उनमें से एक है भारत से वो सब त्यौहार और परंपराएं ख़त्म कर देनी हैं जो भारतीयों को एक दूसरे से जोड़ती हों. ये त्यौहार और परंपराएँ ही भारतीयों की सबसे बड़ी ताकत है जो उन्हें एक दूसरे से जोड़े रखती हैं.

Project Thessalonica: भारतीय त्यौहारों को खत्म करने की साजिश

आज की दुनिया सामुदायिक रूप से चार मुख्य वर्गों में बंटी है:

  • ईसाई
  • इस्लाम
  • नास्तिक
  • हिन्दू

कुछ सदियों पहले ऐसा नहीं था. दुनिया में अनेकों सभ्यताएं, संस्कृतियाँ और भाषाएँ थीं जैसे Red Indian, Inca, Aztec, Maya, Lucayan, Taino, Babylonian, Egyptian, Viking, Greek और Pagan. आज इन सब  सभ्यताओं का कोई अस्तित्व नहीं है, यहाँ तक की उनकी अपनी भाषाएँ भी दम तोड़ चुकी हैं.  इन प्राचीन सभ्यताओं के मिटने का सिर्फ एक कारण था ईसाई सभ्यता का उदय जिसके हमले ने दुनिया की इन सभी सभ्यताओं का अस्तित्व मिटा दिया.

अब कुछ ऐसा ही खेल चल रहा है दुनिया में बची एकमात्र गैर-अब्राह्मिक सभ्यता हिन्दू सभ्यता के साथ. ब्रिटिश राज के दौर से जो खेल शुरू हुआ था अब वो अपने शिखर पर है. भारत में हिन्दुओं का धर्मांतरण ना ही मात्र एक सामाजिक समस्या है बल्कि कूटनीतिक रूप से भी भारत की एकता एवं अखंडता के लिए खतरा है.

क्या है Project Thessalonica

आप देख रहे होंगे, पिछले कुछ वर्षों से भारतीय त्योहारों, परंपराओं पर बेहद सुनियोजित ढंग से हमले किये जा रहे हैं, भारत की एक-एक परंपरा पर ऐसे कुठाराघात किया जा रहा है जैसे भारतीय अपने त्यौहार मनाकर कोई अपराध कर रहे हों।

तथाकथित पढ़े-लिखे भारतीयों का एक बड़ा वर्ग इस दुष्प्रचार का शिकार हो चुका है जिसे लगने लगा है कि, भारत के त्यौहार और परंपराएं गलत हैं. वही लोग जो क्रिसमस-हैलोवीन-ईसाई नववर्ष जैसे ईसाई त्यौहारों पर ऊधम मचाते हैं होली-दीवाली आते ही उन्हें पर्यावरण की और स्वास्थ्य की चिंता होने लगती है.

क्या आपने कभी विचार किया है, आखिर ये अचानक से हमारे त्यौहारों-परंपराओं को क्यों निशाना बनाया जाने लगा? और Christian त्यौहारों (like Christmas, Easter, Halloween, Good Friday) की स्वीकार्यता कैसे बढ़ने लगी?

उसका कारण है ईसाईयों के एक ताकतवर संगठन Jesuits ने 2004 में भारत के लिए Joshua Project Part-II लांच किया था, जिसका एक अहम हिस्सा था Project Thessalonica.

Project Thessalonica के अंतर्गत भारतीय त्यौहारों-परंपराओं को बदनाम करना, उन्हें पुराना, दकियानूसी बताना, फिर उन्हें कोर्ट में Church-Missionaries समर्थित NGOs के द्वारा पर्यावरण संरक्षण के नाम पर चुनौती देकर उन पर प्रतिबंध लगवाना ऐसे काम शामिल है.

सुनियोजित रूप से भारतीय त्यौहारों एवं परंपराओं पर हमले

आजकल TV, अखबारों, न्यूज़ चैनलों, बॉलीवुड सितारों, तथाकथित नारीवादी संस्थाओं, हिन्दू विरोधी NGOs के द्वारा Hindu Rituals पर चुन-चुन कर हमले किए जा रहे हैं. जैसे

  • होली पर रंग खेलना गलत है, इससे पानी का व्यय होता है
  • दीपावली से हवा का प्रदूषण फैलता है
  • छठ पूजा पाखंड है. इससे नदी में प्रदूषण बढ़ता है
  • गणेश चतुर्थी और दुर्गाष्टमी के पर्व पर मूर्ति विसर्जित करने से नदियों एवं सागरों में प्रदूषण होता है
  • नदियों में अस्थि विसर्जन से प्रदूषण फ़ैल रहा है
  • करवा चौथ पितृ-सत्तात्मक है,ये त्यौहार महिलाओं को पुरुषों की जागीर समझनेवाले मानसिकता के लोगो का पर्व है
  • रक्षाबंधन महिला विरोधी है, महिलाओं को पुरुषों के ऊपर आधारित बनानेवाला त्यौहार है
  • हिन्दुओं की लाशें जलाने से प्रदूषण बढ़ता है
  • जल्लीकट्टू जानवरों पर हिंसा है
  • सबरीमाला मंदिर महिलाओं पर अत्याचार का प्रतीक है
  • विद्यालयों में विद्या की देवी सरस्वती की तस्वीर सांप्रदायिक है
  • संस्कृत, श्रीमद्भागवत गीता, वेद, उपनिषदों को पढ़ना या पढ़ाना शिक्षा का भगवाकरण है
  • लकड़ियों से अंतिम संस्कार करना पर्यावरण को नुकसान पहुँचाता है
  • महिलाओं का मांग में सिंदूर भरना, गले में मंगलसूत्र पहनना, लड़की के पिता द्वारा कन्या दान करना ये सब महिला विरोधी और पितृसत्तात्मक रीतिरिवाज हैं

शायद ही ऐसा कोई हिन्दू त्यौहार हो जिसे अभी कटघरे में ना खड़ा किया गया हो. इसके पीछे उद्देश्य क्या है ये शायद अभी हिन्दुओं को ही नहीं पता.

इतिहास की किताबों से ईसाईयों के अत्याचार गायब क्यों

हमारी इतिहास की किताबें इस्लामिक अत्याचारों से भरी पड़ी हैं लेकिन ईसाई सभ्यता के पापों का विवरण उसमें लगभग ना के बराबर मिलता है. जिसका कारण विश्वव्यापी ईसाई इकोसिस्टम का भारतीय अध्ययन एवं अध्यापन क्षेत्र में अंदर तक पकड़ होना है.

वास्तव में क्रूरता में ईसाई, इस्लामिक धर्मांधों से अधिक क्रूर, कट्टर एवं धर्मांध रहे है. ईसाइयों ने अपने मजहब के प्रचार के लिए लाखों लोगों को मौत के घाट तो उतारा ही साथ में अनगिनत संस्कृतियों को भी समाप्ति किया.

आज का Super Power माना जाने वाला अमेरिका खुद लाखो Red Indians के कत्लेआम के बाद बना है. कुछ यही हाल आस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड का है. आज जितने भी यूरोपीय देश खुद को मानवता का संरक्षक बताते है वास्तव में उनका इतिहास खून से सना हुआ है.

Britain, France, Spain, Portugal, Netherlands, Germany, Italy, Norway, Denmark इन देशों ने अफ्रीका, उत्तर अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, सेंट्रल अमेरिका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया में मूल संस्कृतियों को नष्ट करने के बाद अगर उन्हें कुछ दिया तो वो था ईसाई धर्म.

अफ्रीकन राष्ट्रवादी जोमो केन्याटा का ईसाई मिशनरियों पर किया गया कटाक्ष आज भी मायने रखता है.

“जब मिशनरी पहुंचे, तो अफ्रीकियों के पास भूमि थी और मिशनरियों के पास बाइबल थी. उन्होंने हमें सिखाया कि कैसे अपनी आँखें बंद करके प्रार्थना करें. जब हमने अपनी आँखें खोलीं, तो उनके पास जमीन थी और हमारे पास बाइबल थी.”

Project Thessalonica का उद्देश्य

ईसाई मिशनरियों का मुख्य लक्ष्य भारत का सम्पूर्ण ईसाईकरण/Christianization है. चूँकि भारत में मारकाट आसान नहीं इसलिए ईसाई मिशनरियों के भारत में तरीके अलग हैं.

आज भारत के 28 राज्यों में 4 राज्य (Nagaland, Mizoram, Meghalaya, Arunachal Pradesh) Christian Majority बन चुके है. ये Project Joshua और Project Thessalonica का ही परिणाम हैं.

भारतीय त्यौहारों और परंपराओं में इतनी सारी कमियां थीं, ये सवा अरब भारतवासियों को पहले कभी नहीं पता था, लेकिन अचानक से हमारी परंपराओं में इतनी सारी कमियां आ गईं.

Project Thessalonica के अंतर्गत जो सबसे महत्त्वपूर्ण लक्ष्य है उनमें से एक है भारत से वो सब त्यौहार और परंपराएं ख़त्म कर देनी हैं जो भारतीयों को एक दूसरे से जोड़ती हों. ये त्यौहार और परंपराएँ ही भारतीयों की सबसे बड़ी ताकत है जो उन्हें एक दूसरे से जोड़े रखती हैं.

भारतीय अमेरिका में हो या जापान में या फिर किसी वीरान गांव में वो इन त्यौहारों और परंपराओं से ही ये अनुभव कर पाता है कि वो भारतीय संस्कृति का अंग है, इसलिए अब इन पर सुनियोजित ढंग से हमले किये जा रहे हैं.

बॉलीवुड, Left-Liberal Eco-system, Media, NGO गिरोह एवं कथित दलित चिंतक वर्ग पर हमेशा से Jesuits का दबदबा रहा है. यही कारण है कि, हिन्दुओं के त्यौहार करीब आते ही ये लोग नए तरीके से ड्रामा शुरू कर देते हैं और उन्हें प्रतिबंधित करने की मांग उठना शुरू हो जाती है.

Project Thessalonica भारत में कितना प्रभावी है ये हम आज महसूस कर सकते हैं और आगे यह कितना कुछ बदलेगा इसका आकलन कठिन काम नहीं है.

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