यूरोप की Witch Burning कैसे बनी भारत में सती प्रथा?

ब्रिटिशों ने बेहद शातिराना तरीके से अपनी बुराइयों को भारत के मत्थे मढ़ दिया और हमारे विद्यालय उसी Propaganda को आगे बढ़ा रहे. यूरोप की बुराइयों से दुनिया का पाला ना पड़े इसके लिए कई कहानियां गढ़ी गईं उनमें से एक है सती प्रथा.

यूरोप की Witch Burning कैसे बनी भारत में सती प्रथा?
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ब्रिटिशों द्वारा लिखे गये भारत के इतिहास में भारतीयों पर कई प्रकार के कलंक लगाये गए उनमें से एक है सती प्रथा. अगर हम शास्त्रों का अध्ययन करें या फिर भारत के प्राचीन साहित्य देखें तो भी हमें औरतों के सती होने जैसे कोई भी प्रमाण नहीं मिलते.

महाभारत और रामायण में भी मरने वाले किसी भी योद्धा की कोई पत्नी नहीं सती हुयी थी. ऐसे ही अगर हम कालिदास पाणिनि या कल्हण सहित अगर अन्य प्राचीन भारतीय विद्वानों की कृतियाँ देखते हैं तब भी हमें ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिलता.

गलत इतिहास पढ़ने के चलते हीनभावना से ग्रस्त भारतीयों को अंग्रेजों ने शिक्षा के माध्यम से ऐसे-ऐसे किस्से रटा दिए जिनका कोई आधार नहीं है. भारत की इतिहास की किताबों में लिखा है कि, सती प्रथा भारत में एक गंभीर बुराई थी जिसे अंग्रेजों ने 1829 में समाप्त कर दिया था.

सती प्रथा को Justify करने के लिए अंग्रेजों ने अपने एक और सहयोगी राजा राम मोहन राय का नाम सती प्रथा के खिलाफ चलाए आन्दोलन से जोड़ दिया था.

अंग्रेज भारत लूटने आये थे या समाज सुधार आंदोलन चलाने?

सती प्रथा जैसी काल्पनिक प्रथाओं पर भरोसा करने वाले विद्वानों को सबसे पहले खुद से ये प्रश्न पूछना चाहिए कि, अंग्रेज भारत को लूटने आये थे या भारत में समाज सुधार आंदोलन चलाने?


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भारत में British Education System के द्वारा लोगों के दिमाग में ये बात डाली गयी कि, भारत में बेहद जहिलाना परंपराएँ थीं जिनसे अंग्रेजों ने छुटकारा दिलाया.

असल में जो प्रथाएं कभी भारत में थीं ही नहीं उन्हें दुर्भावनापूर्ण इतिहास लेखन के जरिये भारत से जोड़ दिया गया. सती प्रथा में सिर्फ सती नाम भारतीय है बाकी सारी प्रथा यूरोप से भारत लाई गयी.

अंग्रेज कैसे लाये भारत में सती प्रथा?

यूरोपीय समाज में औरतों को Witch (चुड़ैल) बोलकर जिंदा जला देने की प्रथा एक भयंकर सामाजिक बुराई थी जिसे ढकने के लिए ऐसी शैतानी प्रथा को भारत के हिस्से मढ़ दिया गया.

यूरोप में Witch के नाम पर ये अपराध उन औरतों के साथ होता था जिनके पतियों की मृत्यु हो जाती थी और वह अकेले जीवन जीने को अभिशप्त होती थीं.

ब्रिटिश इतिहास में औरतों को जिंदा जलाये जाने को लेकर लिखे गये लेख Witches in Britain में यूरोप की इस कुप्रथा पर विस्तार से लिखा गया है.

यूरोप में Witch के नाम पर जितनी औरतों को ज़िंदा जलाया गया, औरतों पर वैसा अत्याचार दुनिया के किसी अन्य हिस्से में देखने को नहीं मिलता.


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Witch के नाम पर जिन औरतों को जिंदा जलाया जाता था उन्हें कई विशेष प्रकार के औजारों से तब तक प्रताड़ित किया जाता था जब तक वह यह मान नहीं लेती थीं कि, वह Witch Practice में संलग्न हैं. यूरोप के चर्च एवं संग्रहालयों में आज भी आप वह औजार देख सकते हैं.

Witchcraft के नाम पर लाखों औरतों की बलि

इस लेख के अनुसार, अकेले पश्चिम यूरोप में Witchcraft के नाम पर 2 लाख से ज्यादा औरतों को प्रताड़ित करके ज़िंदा जला दिया गया था. यूरोप की इन मासूम औरतों के साथ जो अत्याचार होता था उसे पढ़कर आपकी रूह काँप जाएगी.

इस यूरोपीय कुप्रथा का शिकार सबसे ज्यादा गरीब, बूढी और विधवा औरतें बनती थीं. अगर ऐसी किसी औरत के घर बिल्ली दिख जाती थी तो उसे निश्चित ही Witch मान लिया जाता था और यूरोप का समाज उन्हें प्रताड़ित करने के लिए इकट्ठा हो जाता था.


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ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, ना ही मात्र इन औरतों को ज़िंदा जलाया जाता था बल्कि कई बार फांसी पर भी चढा दिया जाता था और यह सब मर्दों एवं औरतों की भीड़ के सामने होता था.

यूरोप की ऐसी बुराइयों से दुनिया का पाला ना पड़े इसके लिए जो थियरी दुनिया के सामने बढ़ाई गयी वो थी भारत की तथाकथित सती प्रथा. ब्रिटिशों ने बेहद शातिराना तरीके से अपनी बुराइयों को भारत के मत्थे मढ़ दिया और हमारे विद्यालय उसी Propaganda को आगे बढ़ा रहे हैं.

अंग्रेजों ने Witch Burning को सती से क्यों जोड़ा?

देवी सती की कहानी भारत में सदियों से सुनाई जा रही है. क्योंकि इसका संबंध हिन्दुओं के प्रमुख देवता भगवान शिव से है. भारत में देवी सती पूजनीय हैं जिन्होंने अपने पति भगवान शिव को यज्ञ में न बुलाये जाने के कारण यज्ञकुंड में ही जलकर प्राण त्याग दिए थे.

देवी सती के इस त्याग को भारत में पति के सम्मान में किये जाने वाले त्याग को उच्चतम त्याग माना जाता है. इसी को आधार बनाकर ब्रिटिश साजिशकर्ताओं ने अपने देश में औरतों के जिंदा जलाए जाने को भारत में आकर सती से जोड़ दिया.


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इतिहास की किताबों में लिखा गया कि, इस प्रथा का अन्त राजा राममोहन राय ने अंग्रेज के गवर्नर लार्ड विलियम बैंटिक की सहायता से किया था लेकिन उसी दौरान जो औरतें ब्रिटेन में Witch के नाम पर जलाई जा रही थीं उन्हें पहले अंग्रेजों ने क्यों नहीं ख़त्म किया इस पर इतिहास की किताबें मौन हैं.

Witch Burning की आज भी यूरोपीय समाज में स्वीकार्यता

आपको जानकर शायद हैरानी हो लेकिन पश्चिमी समाज में आज भी Witch (चुड़ैल औरत) जैसी चीजों पर भरोसा किया जाता है. ऐसी बहुत सारी फ़िल्में और वेब सीरीज बन रहीं जिसमें Witch के शिकार को महान कम बताकर Justify किया गया है. अंधविश्वास की अगर बात करें तो आज भी यूरोपीय समाज में वह फिल्मों और साहित्यों के नाम पर मौजूद है.

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